BEd vs Integrated BEd News: इन दिनों शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है। खासतौर पर 12वीं पास करने के बाद जब करियर चुनने का समय आता है, तब कई छात्रों के मन में यह सवाल होता है कि बीएड करें या इंटीग्रेटेड बीएड। पहले जहां बीएड को ही शिक्षक बनने का मुख्य रास्ता माना जाता था, वहीं अब इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को एक बेहतर और समय बचाने वाला विकल्प माना जा रहा है। दोनों ही कोर्स शिक्षक बनने से जुड़े हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई की संरचना, अवधि और फायदे अलग-अलग हैं। ऐसे में सही निर्णय लेने के लिए इन दोनों कोर्स को विस्तार से समझना जरूरी है।
बीएड कोर्स क्या है और क्यों जरूरी माना जाता है
बीएड यानी बैचलर ऑफ एजुकेशन एक प्रोफेशनल टीचर ट्रेनिंग कोर्स है, जिसे ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है। इस कोर्स की अवधि आमतौर पर दो साल होती है। जो छात्र सरकारी या निजी स्कूलों में शिक्षक बनना चाहते हैं, उनके लिए बीएड की डिग्री अनिवार्य मानी जाती है।
बीएड कोर्स में छात्रों को पढ़ाने की तकनीक, बच्चों की मनोविज्ञानिक समझ, पाठ योजना बनाना, कक्षा प्रबंधन और मूल्यांकन प्रणाली की ट्रेनिंग दी जाती है। इस कोर्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों को एक कुशल शिक्षक के रूप में तैयार करना होता है। बीएड पूरा करने के बाद उम्मीदवार CTET, TET या राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में आवेदन कर सकते हैं।
इंटीग्रेटेड बीएड क्या है और कैसे काम करता है
इंटीग्रेटेड बीएड एक संयुक्त कोर्स है, जिसमें ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई एक साथ कराई जाती है। यह कोर्स 12वीं के बाद शुरू होता है और इसकी कुल अवधि चार साल होती है। इसमें छात्र BA-BEd या BSc-BEd जैसे विकल्प चुन सकते हैं।
इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्रों को अलग-अलग चरणों में एडमिशन लेने की जरूरत नहीं पड़ती। पढ़ाई की शुरुआत से ही विषय ज्ञान के साथ-साथ टीचर ट्रेनिंग चलती रहती है। कोर्स पूरा होते ही छात्र के पास ग्रेजुएशन और बीएड दोनों की डिग्री होती है, जिससे वह सीधे शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकता है।
BEd vs Integrated BEd News: दोनों कोर्स में मुख्य अंतर
बीएड और इंटीग्रेटेड बीएड के बीच सबसे बड़ा अंतर समय का है। पारंपरिक बीएड के रास्ते में पहले तीन साल की ग्रेजुएशन और फिर दो साल का बीएड करना पड़ता है, यानी कुल पांच साल लगते हैं। वहीं इंटीग्रेटेड बीएड में यही पढ़ाई चार साल में पूरी हो जाती है।
पढ़ाई के तरीके में भी अंतर है। बीएड में पहले विषय की पूरी पढ़ाई होती है और बाद में शिक्षक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके विपरीत, इंटीग्रेटेड बीएड में शुरुआत से ही दोनों चीजें साथ-साथ चलती हैं। यही वजह है कि इसे अधिक व्यवस्थित और व्यावहारिक माना जा रहा है।
योग्यता और एडमिशन प्रक्रिया की जानकारी
बीएड में एडमिशन के लिए उम्मीदवार का ग्रेजुएशन पास होना जरूरी है। अधिकतर राज्यों और विश्वविद्यालयों में बीएड एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम आयोजित किए जाते हैं। कुछ संस्थान मेरिट के आधार पर भी दाखिला देते हैं।
इंटीग्रेटेड बीएड के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना अनिवार्य है। कई केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय इस कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं, जबकि कुछ कॉलेज 12वीं के अंकों के आधार पर भी एडमिशन देते हैं। इसलिए छात्रों को आवेदन से पहले संबंधित यूनिवर्सिटी की आधिकारिक अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए।
किस कोर्स से शिक्षक बनने का रास्ता आसान
BEd vs Integrated BEd News को देखें तो इंटीग्रेटेड बीएड छात्रों के लिए समय की बचत करता है। चार साल में ही पूरी तैयारी होने के कारण छात्रों को एक अतिरिक्त साल मिल जाता है, जिसे वे शिक्षक पात्रता परीक्षाओं की तैयारी में लगा सकते हैं।
वहीं बीएड करने वाले छात्रों को पहले ग्रेजुएशन और फिर बीएड पूरा करना पड़ता है, जिससे शिक्षक बनने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो जाती है। हालांकि सरकारी भर्तियों में दोनों डिग्रियां समान रूप से मान्य होती हैं और चयन पूरी तरह मेरिट व परीक्षा प्रदर्शन पर निर्भर करता है।
करियर और अवसरों के लिहाज से तुलना
बीएड और इंटीग्रेटेड बीएड दोनों ही कोर्स पूरा करने के बाद उम्मीदवार सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षक बन सकते हैं। इसके अलावा कोचिंग संस्थानों, एजुकेशन कंटेंट डेवलपमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन जैसे क्षेत्रों में भी अवसर मिलते हैं।
इंटीग्रेटेड बीएड करने वाले छात्रों को अकादमिक निरंतरता का लाभ मिलता है। वहीं बीएड करने वाले छात्रों के पास ग्रेजुएशन के दौरान अन्य करियर विकल्पों को आजमाने का मौका रहता है। इसलिए करियर की दिशा चुनते समय यह देखना जरूरी है कि छात्र शुरू से शिक्षक बनना चाहता है या नहीं।
छात्रों के लिए सही विकल्प कैसे चुनें
अगर कोई छात्र 12वीं के बाद ही तय कर चुका है कि उसे शिक्षक ही बनना है, तो इंटीग्रेटेड बीएड एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इससे समय, मेहनत और संसाधनों की बचत होती है।
वहीं अगर कोई छात्र पहले ग्रेजुएशन के दौरान अपने विषय को गहराई से पढ़ना चाहता है और बाद में शिक्षक बनने का निर्णय लेना चाहता है, तो बीएड उसके लिए बेहतर रहेगा। दोनों ही विकल्प अच्छे हैं, बस जरूरत है सही समय पर सही निर्णय लेने की।
निष्कर्ष
BEd vs Integrated BEd News यह साफ संकेत देता है कि शिक्षक बनने के रास्ते अब पहले से ज्यादा आसान और सुव्यवस्थित हो गए हैं। इंटीग्रेटेड बीएड जहां समय बचाने और जल्दी करियर शुरू करने का मौका देता है, वहीं बीएड पारंपरिक और आजमाया हुआ रास्ता है।
छात्रों को अपनी रुचि, आर्थिक स्थिति और भविष्य की योजना को ध्यान में रखकर ही कोर्स का चयन करना चाहिए। सही जानकारी और समझ के साथ लिया गया फैसला ही एक सफल शिक्षक करियर की मजबूत नींव बन सकता है।






